देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ, जेब में रखी गीता से हुई थी पार्थिव शरीर की पहचान

New Delhi: देश में सुरक्षा सैनिक दिन-रात डटे रहते हैं. ना भूख की फिक्र ना बीमारी की. बारिश हो या धूप या ओले ही क्यों ना गिरें, लेकिन हमारे ये जवान अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटते हैं. हम बात कर रहे हैं एक ऐसे भारतीय की जिसकी पहचान पॉकेट में रखी गीता से हुई थी.

नाम – कमांडर सोमनाथ शर्मा. 1947 में पाकिस्तान को हरा दिया था.  उनकी वीरता के लिए उन्हें म’रणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था. खास बात यह है कि सोमनाथ शर्मा परमवीर चक्र पाने वाले देश के पहले वीर हैं.

31 जनवरी 1923 को कांगड़ा में जन्में मेजर सोमनाथ ने जब पाक से लो’हा लिया तो उस दौरान उनकी उम्र महज 24 साल थी.   इतनी कम उम्र में देश की सुरक्षा में वह श’हीद हो गए. आज भी उनकी श’हादत को याद कर पूरा देश उनके जज्बे को सलाम करता है.

सोमनाथ शर्मा की एक आदत आज भी लोग याद करते हैं. मेजर शर्मा को अपनी पैंट की जेब में गीता रखने की आदत थी. जब वह पाक से लोहा लेते हुए श’हीद हुए तो उनकी पहचान कर पाना मुश्किल था, ऐसे में उनकी पैंट में रखी गीता से उनके पार्थिव शरीर की पहचान की गई थी.

आपको बता दें कि सोमनाथ भले ही श’हीद हो गए, लेकिन दु’श्मनों से हार नहीं माने. उन्होंने दु’श्मनों को आगे बढ़ने नहीं दिया.  मेजर सोमनाथ जैसे वीर हर दिन हमारे देश की रक्षा में सीमा पर अपने प्राणों की आ’हुती देते हैं’ हमारा कर्तव्य है कि हम इन वीरों को याद कर इनकी श’हादत का मान रखें’

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