पिता ने की मां की आखिरी ख्वाहिश पूरी, रिक्शा चलाकर कमाए पैसे.. बेटे को पढ़ाकर बनाया आर्मी अफसर

New Delhi: जिंदगी में वही कामयाब होता है, जो दिन-रात अपने सपनों में खोए रहते हैं और उसे पूरा करने के लिए मेहनत करते हैं। इन बातों को साबित करने के लिए कई उदाहरण वक्त-वक्त पर सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रहने वाले ‘धवन सार्थक शशिकांत’…

धवन सार्थक ने बचपन से बड़े बनने के ख्वाब देखें और उन्हें पूरे करने के लिए जी जान से मेहनत की। धवन के सपने पूरे करने में उनके पिता का भरपूर सहयोग रहा है। धवन सार्थक का जीवन गरीबी में गुजरा। उनके पिता स्कूली रिक्शा चलाने का काम करते हैं। इससे जो इनकम आती, उससे घर का गुजारा चलता था।

जैसे-तैसे सब ठीक ही चल रहा था, लेकिन मां के नि’धन ने परिवार की स्थिति खराब कर दी। धवन की मां की सड़क हाद’से में मौ’त हो गई। घर के हालात ऐसे हो गए कि नौबत पढ़ाई छोड़ने तक की आ गई। लेकिन एक पिता अपने बच्चों को सफलता की ऊंचाईयों पर देखना चाहता था, इसलिए उसने ऐसा नहीं होने दिया।

स्कूली रिक्शा के अलावा वो दिन-रात सड़कों पर रिक्शा चलाते थे, ताकि धवन सार्थक अपने सपनों को पूरा कर सके। जीतो’ड़ मेहनत कर एक पिता ने अपने बेटे को किसी चीज की कमी नहीं होने दी। जितना कर सकते थे, उससे कही ज्यादा अपने बेटे के लिए किया।

बेटे का एडमिशन अच्छे प्राइवेट स्कूल में कराया। हर वो चीज लाकर दी, जो धवन के लिए जरुरी थी और इन सब का नतीजा बेहद शानदार निकला। पिता की मेहनत के कारण धवन सार्थक आर्मी अफसर बना। दरअसल, इंडियन मिलट्री एकेडमी से सिर्फ 423 जवान पास हुए। इन जवानों में धवन सार्थक भी शामिल हैं।

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