एक हाथ से ही दि’व्यांग धनजीभाई ने किया स्कूटर का आविष्कार,म’जाक उड़ाने वाले अब सैल्यूट करते हैं

New Delhi: कहते हैं कि काबिलियत किसी उम्र और किसी शा’रीरिक क्षमता की मोहताज नहीं है, बस जरूरत है तो सिर्फ एक मौके और दृढ़ निश्चय की… इस बात को साबित कर दिखाया है, गुजरात के कच्छ इलाके में रहने वाले धनजीभाई केराई ने….

दो साल की उम्र में धनजीभाई केराई को पो’लियो हो गया था। जिसके चलते परिवार के सदस्य उनके भविष्य को लेकर अक्सर चिंता में रहते थे। शायद इसलिए क्योंकि वो इस बात से बेखबर थे कि धनजीभाई के अंदर आ’त्मशक्ति कितनी प्रबल है।

दरअसल, धनजीभाई के दोनों पैर और एक हाथ बिल्कुल काम नहीं करते। जिसके कारण कोई तो उनका मजाक उड़ाता तो कोई उनपर तरस खाता था। धनजीभाई नहीं चाहते थे कि कोई उनपर तरस या उनका मजाक उड़ाए, वो आत्मनिर्भर बनना चाहते थे। स्कूल जाने के बजाय धनजीभाई ने इलेक्ट्रीशियन का काम सीखा।

जिसके कारण उन्हें आस पड़ोस में काम मिलने लगा। वो खुद से एक मिनट में सिर्फ 3 मीटर ही चल पाते थे। ऐसे में उन्हें कही जाने के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। जिदंगी भर दूसरों का सहारा लेना धनजीभाई को नागवार गुजरा और उन्होंने खुद का एक स्कूटर बनाने का सोचा।

इसके लिए उन्होंने एक पुराना स्कूटर खरीदा और उसे अपने मुताबिक बनाने के काम में जुट गए। स्कूटर बनाने के लिए धनजीभाई ने कई बातें अपने दिमाग में रखी, जैसे-उन्हें अपनी शा’रीरिक क्ष’मता के हिसाब से स्कूटर में क्या-क्या चाहिए, चूंकि उनके दोनों पैर और एक हाथ काम नहीं करता इसलिए उन्हें ऐसा क्या करना चाहिए, जिसके जरिए वो एक हाथ से स्कूटर चला पाएं।

इन्हीं बातों के समाधान के तौर पर उन्होंने सबसे पहले बैलेंस बनाने के लिए स्कूटर में चार पहिए लगाए। रियर ब्रेक की जगह उन्होंने आसानी से ऑपरेट होने वाला ली’वर लगाया और सीट को भी मॉडिफाई किया। उन्होंने अपनी सीट को इस तरह फिट की ताकि उनका हाथ हैंडल तक पहुंच जाएं।

इस तरह उन्होंने अपने स्कूटर को तैयार किया। इन सब में 6 हजार का खर्चा आया। इस पूरे काम में उन्हें लगभग तीन से चार महीने लगे। उनके स्कूटर बनाने के आविष्कार ने ये साबित कर दिखाया कि मन में विश्वास हो तो शरीर की कमी भी रास्ते में रो’ड़ा नहीं बन सकती।

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