दिन-रात मेहनत करके मां ने बेटे राजेंद्र को बनाया IAS ऑफिसर, इनकी कहानी आपको भावुक कर देगी

New Delhi: अगर जिंदगी में कुछ कर गुजरने का संकल्प ले लिया जाए, तो आपके पास मुश्किल से मुश्किल हालातों से बाहर निकलने का तरीका खुद मिल जाएगा और एक दिन वो भी आएगा, जब सफलता आपके कदमों को चूमेगी।

आज हम जिस शख्स की कहानी बताने वाले है, उस शख्स ने अपने जीवन में हर परेशानियों का सामना किया है। कभी हार न मानना वाला जज्बा साथ रखा है। ये शख्स कोई और नहीं बल्कि साल 2013 बैच के आईएएस अफसर डॉ राजेंद्र भारूड है।

डॉ राजेंद्र भारूड एक गरीब परिवार से आते है, ऐसे में कई चीजों और सुविधाओं के अभाव ने उनके आगे परेशानी खड़ी की, लेकिन वो नहीं रुके और मेहनत करते रहे। डॉ राजेंद्र भारूड का जन्म महाराष्ट्र के धुले जिले में हुआ।

राजेन्द्र जब अपनी मां के पेट में थे, तभी उनके पिता ने दुनिया से अ’लविदा कह दिया था। सिर पर पिता की छाया न होना एक बच्चे के आत्मविश्वास को डि’गा देती है। वहीं एक पिता के बिना किस तरह परिवार चलेगा, इस बात की चिंता मां को खाई जा रही थी।

तभी किसी ने उनकी मां को श’राब बेचने का सुझाव दिया, ताकि उससे आए पैसों से दो वक्त की रोटी खाई जा सके। अपने बेटे को पालने के लिए एक मां ने श’राब बेचना भी शुरु कर दिया। हालांकि उनकी मां को कई बार लोगों ने अ’बॉ’र्शन कराने के लिए भी कहा, पर उन्होंने बच्चे को जन्म देने का फैसला लिया।

मां ने बच्चे को जन्म दिया और नाम रखा ‘राजेंद्र भारूड’, तब एक मां को नहीं पता था, कि उनका बेटा एक दिन उनका नाम रोशन करेगा। महज एक-दो साल की उम्र में राजेंद्र को श’राब पिलाई जाती, जब भी भूख लगने पर वो रोते तो श’राबी लोग उनके मुंह में श’राब की दो-चार बूं’दे डाल देते।

अब जरा सोचिए, इस उम्र में जहां बच्चे को दूध की जरुरत होती है, उस उम्र में लोगों ने उन्हें श’राब पि’लाई। वक्त के साथ राजेंद्र जब बड़े हो गए तो हालातों को समझने की समझ उन्हें होनी लगी और वो एक बात अच्छे से समझ गए कि इन हालातों से बाहर निकलने का एक ही रास्ता है वो है ‘शिक्षा’…

लेकिन परिवार की हालत ऐसी नहीं थी, वो राजेंद्र को पढ़ा सके। जो लोग उनके दुकान पर श’राब पीने आते, वो श’राब के साथ स्नैक्स आदि जैसी चीज मंगाते और उसके बदले में उन्हें कुछ पैसे देते। इन्हीं पैसों से वे किताबें खरीदते और पढ़ाई करते।

इन सब में उनकी मां ने भी उनका भरपूर साथ दिया। आखिरकार वो वक्त भी आया जब उनकी मेहनत रंग लाने लगी। 10वीं बोर्ड में उन्हें 95 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए वहीं 12वीं में 90 फीसदी अंक… स्कूली पढ़ाई के बाद उन्होंने मेडिकल एग्जाम भी क्रैक किया और मुम्बई के सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया और धीरे-धीरे अपनी मंजिल पर पहुंच गए।

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