बोल-सुन नहीं सकते, बचपन से दोनों हाथ भी नहीं है, पैरों से ही जानदार पेंटिंग्स बनाते हैं गोकरण

New Delhi: जिंदगी में हमें क्या कुछ मिला, इस बात पर गौर न करके हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जिंदगी ने हमें क्या-क्या दिया है। तभी हम एक बेहतर जीवन जी पाएंगे। इसका बेहद अच्छा उदाहरण है, ‘गोकरण पाटिल’..

गोकरण पाटिल जन्म से ही दि’व्यांग हैं। उनके दोनों हाथ नहीं है, वो न तो बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं। बावजूद इसके गोकरण पाटिल कामयाबी के शिखर पर हैं। उनकी तारीफ पीएम मोदी ने भी की है। गोकरण का जन्म 16 मार्च 1980 को छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ।

दिव्यांग होने के कारण उनके माता-पिता को उनकी चिंता सताती रहती थी, लेकिन गोकरण पाटिल बचपन से आत्मनिर्भर होना चाहते थे, इसलिए वो सब काम करने की कोशिश करते, जो एक आम इंसान करता है। गोकरण ने अपने पैरों को ही अपने हाथ बना लिए।

यहां देखिए वीडियो-

वो अपने पैरों के जरिए लिखते, कंप्यूटर पर टाइप करते, कपड़े पहनते यानी वो सारे काम कर लेते, जो आप और हम हाथों के जरिए करते है। गोकरण के अंदर एक महान काबिलियत ये है कि वो अपने पैरों के इस्तेमाल से ऐसी-ऐसी सुंदर पेटिंग्स बनाते है, जिसे देख लोग हैरान रह जाते है।

उनका कमरा पेटिंग्स से भरा हुआ है। उनकी पेटिंग्स से भरपूर एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। गोकरण ने अपने पैरों के जरिए पेटिंग्स में जान डाल दी है। हर कोई उनकी तारीफों के पुल बांध रहा है। गोकरण अब लोगों को पेटिंग बनाना सिखाते है।

गोकरण अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 12वीं क्लास के बाद यूपी के चित्रकुट के एक कॉलेज से बैचलर ऑफ फाइट आर्ट्स की पढ़ाई की और कंप्यूटर पर टाइपिंग सीखी। गोकरण के एक भाई और एक बहन है। उनके पिता का नि’धन हो चुका है।

पिता के नि’धन के बाद ही उन्होंने अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी उठाने का फैसला लिया। चूंकि गोकरण को टाइपिंग आती थी, उन्हें काम भी मिला। लेकिन कोई सैलरी देने के वक्त आनाकानी करता, तो कोई उनकी दि’व्यांगता का मजाक उड़ाता। ऐसे में गोकरण ने ठान लिया कि वो अपनी अलग पहचान बनाएंगे।

गोकरण को पेटिंग्स बनाने का बहुत शौक था। अपनी इस शौक को उन्होंने अपने करियर के तौर पर लिया और बच्चों को पेटिंग्स सिखाने की कोचिंग शुरू कर दी। आज उनके पास बहुत से बच्चे पेटिंग्स सीखने आते है।

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